डीसीसी

विकास समन्वय समिति वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी, द्वारा गठित एक शीर्ष समिति है जो उद्योगों के प्रतिनिधियों  जिसमें विभिन्न सेवा प्रदाताओं और एसोसिएशन भी शामिल होती हैं, से मिलकर बनती है । उपरोक्त डिस्पलिन में  से प्रत्येक के लिए अलग डीसीसी का गठन किया जाएगा। एक तकनीकी संस्थान होने के कारण, डीसीसी के लिए उद्योगों से नामांकित करने के लिए उचित विशेषज्ञों की पहचान करने के लिए विशेष प्रयास की जरूरत होती है । जीआर/ आईआर/ एसआर की संस्तुति हेतु डीसीसी वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी से अनुमोदन के लिए अंतिम समिति है।

टीईसी में तकनीकी विषयों के समाधान हेतु सात उप भागों में बांटा जाता है : – 

क़) नैक्सट जेनेरेशन नेटवर्क (कोर नेटवर्क, नेटवर्क संबद्ध सेवाओं और अनुप्रयोग के बीच अंतर)

ख) ट्रांसमिशन (ऑप्टिकल, रेडियो, कोर, एज और एक्सेस के लिए सैटेलाइट ट्रांसपोर्ट )

ग) फ्यूचर नेटवर्क (एक्सेस और टर्मिनल)

घ) सूचना प्रौद्योगिकी (लैन, वैन, राउटर, स्विच, आईपी टीवी, आदि)

ड़) टेरेस्टरियल वायरलेस एक्सेस (जीएसएम, सीडीएमए, वाइमैक्स, वाईफाई, स्पेक्ट्रम, आदि)

च) फिक्स्ड एक्सेस (केबल, पावर प्लांट, टावर्स, एंटेना)।

छ) रेडियो

एक डीसीसी सदस्य आमतौर पर एक संगठन के शीर्ष प्रबंधन में से होता है जो उसकी/ उसके संगठन का विजन, योजना और उद्देश्य को अभिव्यक्त करने में सक्षम से है।

टीईसी में प्रत्येक डीसीसी बैठक का संयोजक एक उप महानिदेशक है। विषयानुसार किसी भी डीसीसी में सदस्य के रूप में एक से अधिक उप महानिदेशक हो सकते हैं । संबंधित उप महानिदेशक द्वारा डिसप्लिन के अंतर्गत विशिष्ट विषयों का संचालन किया जाता है। अंतर-अनुशासनात्मक समन्वय के लिए, एक डीसीसी का संयोजक किसी भी बैठक में भाग लेने के लिए किसी अन्य उप महानिदेशक को आमंत्रित कर सकते हैं। विशेषज्ञ की सलाह के लिए या डिबेट के लिए वह भी कुछ विशेष आमंत्रितगणों पर निर्भर करता है।

उपयोगकर्ताओं/सेवा प्रदाताओं में से विशेषज्ञ वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी द्वारा एक वर्ष के लिए नामित किए जाते हैं । एक विशेषज्ञ एक वैकल्पिक सदस्य को मनोनीत नहीं कर सकते।

यदि आवश्यकता हो तो किसी भी समय वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी द्वारा डीसीसी का पुनर्गठन किया जा सकता है।

विकास समन्वय समिति के कार्य

डीसीसी एक नई जीआर/आईआर/एसआर तैयार करने की संस्तुति के लिए उत्तरदायी है। वे किसी भी जीआर/आईआर/एसआर के पुनरीक्षण या प्रत्याहार की संस्तुति करते हैं। एक शीर्ष समिति के नाते, डीसीसी फ्यूचर नेटवर्क तत्वों या प्रौद्योगिकियों के लिए विजन प्रदान करती हैं और संबंधित डीसीसी उप-समिति को आवश्यक दिशानिर्देश देती है जो तकनीकी विचार-विमर्श और दस्तावेजों को तैयार करने में मदद करता है। डीसीसी राष्ट्रीय स्तर की योजना पर भी काम शुरू कर सकती है और टीईसी को अपनी संस्तुति पेश करती है।

विकास समन्वय समिति की कार्यप्रणाली
  • विकास समन्वय समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में होती है । अगर जरूरी हो तो बैठक पहले भी बुलाई जा सकती है ।
  • मैन्युफैक्चरर्स फोरम से तथा टीईसी के सभी उप महानिदेशकों से प्राप्त टिप्पणियों के साथ संक्षेप- डीसीसी ड्राफ्ट बैठक के सभी सदस्यों को, बैठक की तारीख से कम से कम 15 दिन पहले भेजा जाता है।
  • मौजूदा दस्तावेज़ के किसी भी खंड में मामूली संशोधन जिनका निपटान जल्द आवश्यक हो, के लिए बैठक से कम से कम 7 दिन पहले वितरित करें ।
  • हर बैठक में संक्षेप- डीसीसी ड्राफ्ट सहित सभी जीआर/आईआर/ एसआर के सभी मामलें संबंधित सूचना के साथ (जैसे एमएफ़ और डीएफसी समूह की टिप्पणी के रूप में) चर्चा किए जाते हैं ।
  • बैठक में उपस्थित सदस्य या वैकल्पिक सदस्य जो अपने संगठन का प्रतिनिधित्व करता/करती है तो उनकी राय को संगठन की राय माना जाता है ।
  • सभी सदस्यों से बैठक में तैयारी के साथ उपस्थित होने की उम्मीद की जाती है । अग्रिम में ही दस्तावेजों पर टिप्पणियाँ भेजने की भी उम्मीद की जाती है जो बैठक में निष्कर्ष पर पहुँचने में मदद करती हैं ।
  • डीसीसी अधिकतम दो बैठकों में संशोधन यदि कोई हो तो, के साथ दस्तावेज़ को अनुमोदित करती है । उस प्रतिपादित दस्तावेज़ को ड्राफ्ट जीआर/आईआर/एसआर कहा जाता है।
  • डीसीसी संयोजक बैठक के 15 दिनों के भीतर, सदस्यों की अतिरिक्त टिप्पणियां (अगर कोई है), सहित डीसीसी बैठक के कार्यव्रत को जारी करता है।
  • ड्राफ्ट जीआर/आईआर/ एसआर, डीसीसी की बैठक के कार्यव्रत के साथ, वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी को लिए अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है ।
  • वरिष्ठ उप महानिदेशक, टीईसी द्वारा मसौदे के अनुमोदन के बाद, अंतिम दस्तावेज जीआर/ आईआर/ एस आर के रूप में जाना जाता है।
एफ़ ए अनुभाग के डीसीसी के सदस्य आई टी अनुभाग के डीसीसी के सदस्य टीडबल्यूए अनुभाग के डीसीसी के सदस्य
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